कुछ महफिलें ख़ास होती हैं
संगीत की धुनें,
हवा में घुल जाए जैसे,
रूह की आवाज़।
मधुर मुस्कानें,
नज़रों में बसी छाँव,
दिल के दीपक।
हँसी की खनक,
गूँजती गलियों में धीरे,
यादों का रंग।
कागज़ की बातें,
सफ़ेद पन्नों पर लिखी,
भावनाओं की छाया।
संगीत की ठंडी,
रात की चाँदनी बिखरे,
महफ़िल महके।
दोस्ती की गर्मी,
हाथों के हल्के स्पर्श में,
अमन की खुमारी।
सुनहरी रोशनी,
दीवारों में चमकती याद,
दिल की महफ़िल।
धीरे-धीरे बातें,
साँसों में घुलती जाती,
सुख की मिठास।
सन्नाटे में भी,
कहीं गूँजती है हँसी,
महफ़िलें जीवित।
संगीत, बातें, हँसी,
हर पल यहाँ अनमोल,
कुछ महफ़िलें ख़ास।
— डॉ. अशोक
