कविता

वूमेन्स वर्ल्ड कप 2025

नई ऐतिहासिक जीत के जश्न का दमदार आग़ाज़ किया है,
घर में छुपी बंद मुस्कुराहटों को बिखेरने का साज़ दिया है,
बेटियों ने बेटियों को भविष्य का एक सुंदर ख़्वाब दिया है,
बुलंद हौसलों से कठिनाइयों को मुॅंह तोड़ ज़वाब दिया है ।

तोड़कर बंदिशें तपस्या से दृढ़ संकल्प को संजीव किया है,
प्रतिभाशाली व्यक्तिव से जड़ों को मज़बूत अतीव किया हैं
ख़्वाबों को हक़ीक़त की धरातल पर श्रम से रंगीन किया है,
खुशियों के ऑंसू दे धड़कनों को “आनंद” यूॅं नवीन दिया हैं ।

पैनी नज़र लक्ष्य की पकड़ संग धैर्य का समावेश किया है,
हार को जीत में ढालना है संभव श्रेष्ठतम परिवेश दिया हैं,
आत्म विश्वास और उत्साह की किरणों का प्रकाश दिया हैं,
अरबों आंखों में पल रहे रंगीन सपनों को आकाश दिया है ।

सर्पीले रास्तों पर पसीने का चमकता शीतल चंदन दिया है,
भारत का ही नहीं विश्व की धड़कनों को नया स्पंदन दिया है,
संगठन की ताकत और समर्पण का जज़्बा प्रस्तुत किया है,
जीत कर वूमेन्स वर्ल्ड कप अलग उदाहरण अद्भुत दिया हैं ।

खुद पर करना होगा यकीं ऐसा महत्वपूर्ण अभ्यास दिया हैं,
जोर शोर हिलोर मचाने को रचने को नया इतिहास दिया है,
नीली जर्सी में बेटियों ने शानदार जीत को अंजाम दिया हैं,
दबी चाहतों को अर्जुन के तीर सा लक्ष्यभेदी पैगाम दिया हैं ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु