अतीत के आँसू
भीगे हैं लम्हे,
यादों की चुप खामोशी—
बरसात ठहरी।
पलकों के कोने,
मौन कहानी कहते—
वक़्त मुसाफ़िर।
टूटे हुए स्वप्न,
राख़ में ढूँढे उजाले—
सवेरा जागा।
भीतर का मौसम,
धूप में भी ठंडक है—
मन बोला कुछ।
रूह की स्याही,
लिख गई बीते पल—
कागज़ सन्नाटा।
आवाज़ पुरानी,
हवा में खोई गूँज—
दर्द मुस्काया।
बूंदों की परतें,
आईने में चेहरा—
बीता कल दिखा।
छूटी जो बातें,
दिल ने रख लीं ख़ामोश—
यादें अब भी हैं।
— डॉ. अशोक
