मुक्तक
हो सम्मान बुजुर्गों का, ज़रूरी है,
ज़िम्मेदारी युवाओं को, ज़रूरी है।
अनुभव बुजुर्गों का, हौसला युवा,
नयी पीढ़ी के कंधों जुआ, ज़रूरी है।
क्यों रखें अपेक्षा, बच्चों से अपने,
क्यों सहे उपेक्षा, बच्चों से अपने?
उपयोगी बन कर रहें, मान बढ़ेगा,
क्यों रहें निराश, बच्चों से अपने?
बच्चे माँगे सलाह, तो अवश्य दीजिए,
मार्गदर्शन समय पर, अवश्य कीजिए।
बात बात में टोकना, अच्छा नहीं होता,
सुझावों का संज्ञान, अवश्य लीजिए।
दुनिया को देखना, उनके नज़रिए से,
कुछ कदम बढ़ना, उनके नज़रिए से।
प्राचीनता का नवीनता से समन्वय हो,
खान पान भी कुछ, उनके नज़रिए से।
— डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन
