कविता

कविता

नव वर्ष की आरुणिम वेला
सुमधुर मुस्कान लिए
सृष्टि का नव सृजन हुआ
पुलकित मन हो गया सवेरा
नव वर्ष में नए पकवान
नए थाल में सजा हुआ
गला शिकवा सब मिट गया
एक दूजे का प्रेम हुआ
नव वर्ष में बच्चे का मन
खुश हुआ मन झूम गया
फूल खिला भौंरे गूंजा
सब मिलकर स्वागत किया
ऐसे ही सब खुशियां बाटे
नया साल का स्वागतम।

— विजया लक्ष्मी

*विजया लक्ष्मी

बिजया लक्ष्मी (स्नातकोत्तर छात्रा) पता -चेनारी रोहतास सासाराम बिहार।