बंधन में बंधोगे जरूर
एक दिन जाति के दम्भ में बैठे
श्रीमान अनंत राम जी से टकरा गया,
आपकी सोच एक पक्षीय हैगलत है बता गया,
वो रात दिन आरक्षण को कोसता है,
जबकि हजारों सालों से वंचितों के हक़ नोचता है,
मैंने कहा अनपढ़ हो क्या,सही क्या है पढ़ते क्यों नहीं,
कुत्सित प्रयास में लगे रहते हो,सही राह बढ़ते क्यों नहीं,
खुद तो कई स्थानों पर सौ प्रतिशत जगह कब्जाये हो,
सुदामा कोटे पर भौंकने कभी क्यों नहीं आये हो,
खाते हो हरदम मलाई,
तो कैसे सोचोगे किसी की भलाई,
क्यों दोमुंहे सांप की तरह लपलपाते हो,
केकड़े की तरह कभी इधर कभी उधर जाते हो,
बताओ सुदामा अपनी जाति के लिए कब प्रताड़ित हुआ है,
क्या किसी के थूक को जीभ से छुआ है,
गरीब रहकर भी वह समाज में
सिर्फ अपनी जाति के कारण मान पाता है,
मेहनत करो भरपूर कमाओ
किसी और का हक़ क्यों कब्जाता है,
शून्य लाकर भी व्यावसायिक कोटे से आगे आ जाते हो,
किसी पद पर बैठ भ्रष्टाचार बढ़ाते हो,
इतरा लो,आरक्षण को गरिया लो,जितना गरियाओगे,
आपके करनी का फल ऐसा होगा कि
अपनी संख्या के हिसाब से
आरक्षण प्रतिशत में बांध दिये जाओगे।
— राजेन्द्र लाहिरी
