नया साल आया
घने सर्द कोहरे को रुख़ से हटाकर,
नया साल आया, नया साल आया।
वो माज़ी के हर दर्दो-ग़म को भुलाकर,
नया साल आया, नया साल आया।।
ये शबनम से धरती नहाई हुई है,
उमंगों की ख़ुश्बू समाई हुई है।
क्षितिज पर सुनहरी सी चादर बिछाकर,
नया साल आया, नया साल आया।।
गगन में परिन्दे चहकने लगे हैं,
चमन के सभी गुल महकने लगे हैं।
ये बेताब भौरों के सँग गुनगुनाकर,
नया साल आया, नया साल आया।।
करे अब न कोई अदावत की बातें,
करें हम हमेशा शराफ़त की बातें।
दिलों में मोहब्बत की शम्अ जलाकर,
नया साल आया, नया साल आया।।
उदय होगा ये ‘भान’, होगा सवेरा,
हटेगा ये नफ़रत-ओ-फ़ितरत का घेरा।।
अमन-चैन लाने की वीणा उठाकर,
नया साल आया, नया साल आया।।
— इ. उदय भान पाण्डेय ‘भान’
