कविता

तुम

तुम इमारत की तरह खूबसूरत
तुम्हारी आँखें झील की तरह शबनमी
उनमें डूब कर बस खो जाऊ कहीं
तुम्हारे मुखरा चांद सा
जिसमें बस खुद को खो दूं कही
तुम्हारी मीठी बोली
मानो उसे बस सुनता ही रहूं
तुम्हारी बिंदिया ने मोह लिया मन मेरा
अब बस तेरा हो जाऊ

— गंगा मांझी

गंगा मांझी

ग्वालियर, मध्य प्रदेश