जिंदगी के बेतरतीब पन्ने
बिखरे से सपने
सुबह की ओस जैसे
चुपचाप चमकते
टूटे हुए पल
हवा में तैरते हैं
यादों के संग
अनकही बातें
खामोशी में लिखी
दिल की इबारत
थकी हुई राह
फिर भी कदम चलते
आशा के संग
अधूरी चाहत
रात की चाँदनी
मन को थामे
जीवन के पन्ने
बेतरतीब सही
पर सच्चे हैं
— डॉ. अशोक
