कविता

मकर संक्रांति और पतंग की बातें

आओ ऐसी पतंग बनाएँ,
जो चारों दिशाओं में लहराए।
विश्व शांति का पाठ पढ़ाए,
प्यार का संदेश फैलाए।
तिल के लड्डू सबमें बाँटें,
खिचड़ी मिलकर साथ में खाएँ।
अपनापन हर दिल में जगाएँ,
भाईचारे को और बढ़ाएँ।
पतंग उड़े जब आसमान में,
सुख-शांति के रंग बिखरें।
हर ओर खुशबू फैल जाए,
तिल-गुड़ जैसे रिश्ते निखरें।
मकर संक्रांति के पावन दिन,
सूरज नई रोशनी लाए।
हर कली मुस्कान बिखेरे,
नई उम्मीदें जग जाएँ।
आओ ऐसी पतंग बनाएँ,
जो दिल से दिल को जोड़ जाए।

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384