गीतिका/ग़ज़ल

कोई ग़म नहीं

हमको जो भूल जाओ कोई ग़म नहीं
जो नज़र भी न आओ कोई ग़म नहीं

पीछे से ना पुकारेंगे हरगिज़ तुम्हें
जो पलट के न आओ कोई ग़म नहीं

हमने वादे पे तेरे यकीं कर लिया
अब मुकर भी जो जाओ कोई ग़म नहीं

दफ़्न कर देंगे नींद ओ सुकूं अपना हम
ख़्वाब में भी न आओ कोई ग़म नहीं

तेरी महफ़िल से बेआबरू हो चले
ना हमें तुम बुलाओ कोई ग़म नहीं

तेरी चाहत में कर देंगे ख़ुद को फ़ना
फिर जो आँसू बहाओ कोई ग़म नहीं

— पूनम पाठक

पूनम पाठक

मैं पूनम पाठक एक हाउस वाइफ अपने पति व् दो बेटियों के साथ इंदौर में रहती हूँ | मेरा जन्मस्थान लखनऊ है , परन्तु शिक्षा दीक्षा यही इंदौर में हुई है | देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से मैंने " मास्टर ऑफ़ कॉमर्स " ( स्नातकोत्तर ) की डिग्री प्राप्त की है | इंदौर में ही एकाउंट्स ऑफिसर के जॉब में थी | परन्तु शादी के बाद बच्चों को उचित परवरिश व् सही मार्गदर्शन देने के लिए जॉब छोड़ दी थी| अब जबकि बच्चे कुछ बड़े हो गए हैं तो अपने पुराने शौक लेखन से फिर दोस्ती कर ली है | मैं कविता , कहानी , हास्य व्यंग्य आदि विधाओं में लिखती हूँ |