पुस्तक समीक्षा

बाल काव्य पुस्तकें: रोचकता, ज्ञान और नैतिकता का संगम

डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा शिक्षा विभाग में राजनीति विज्ञान की पीजीटी लेक्चरर हैं तथा राजनीति विज्ञान में पीएचडी धारक। उनकी बाल कविता पुस्तकें “बच्चों की दुनिया और परियों से संवाद” बच्चों के लिए अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक हैं। ये काव्य संग्रह बाल मन की मासूमियत को परियों के जादुई संवादों से सजाते हैं, नैतिक शिक्षा प्रदान करते हुए कल्पना की उड़ान भराते हैं।

लेखिका का संक्षिप्त परिचय  
डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्रों को राजनीतिक सिद्धांत, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था सिखाती हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें बाल साहित्य में गहराई प्रदान करती है। राजनीति विज्ञान की विद्वान होने के बावजूद वे सरल कविताओं के माध्यम से बच्चों को सेवा भाव, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्य सिखाती हैं। “परियों से संवाद” तथा “बच्चों की दुनिया” जैसी रचनाएं उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण हैं। हरियाणा की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि इन कविताओं में झलकती है, जैसे सरसों के खेतों में उड़ती परियां। शिक्षा और साहित्य के इस संगम ने उन्हें युवा लेखिका के रूप में पहचान दिलाई है।  

 पुस्तकों का सारांश  
“परियों से संवाद” में 60 बाल कविताएं हैं, जो परियों के संवादों के रूप में बुनी गई हैं। प्रत्येक कविता बच्चे के दैनिक जीवन के प्रश्नों का उत्तर देती है—दोस्ती, ईमानदारी, प्रकृति प्रेम आदि। “बच्चों की दुनिया” में 70 छोटी कविताएं हैं, प्रत्येक 16 पंक्तियों की, जो बचपन के खेल, त्योहारों और मासूम सवालों पर केंद्रित हैं। दोनों संग्रह हिंदी में सरल भाषा में लिखे गए हैं। पोथी डॉट कॉम पर उपलब्ध ये पुस्तकें 5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए आदर्श हैं। स्थानीय लोककथाओं का परी रूप इन्हें हरियाणा के ग्रामीण बच्चों से जोड़ता है। कुल मिलाकर, ये काव्य संग्रह वास्तविकता और कल्पना का सुंदर पुल हैं।  

 भाषा शैली एवं प्रस्तुति  
भाषा अत्यंत सरल, लयबद्ध और संगीतमय है। छोटे-छोटे वाक्य बच्चों को आसानी से आकर्षित करते हैं। परियों के संवाद जीवंत हैं, जैसे “हे नन्हे बच्चे, झूठ से परियां दूर भागती हैं।” छंद और अलंकार का प्रयोग कविताओं को गेय बनाता है। राजनीतिक अवधारणाओं को परी कथाओं में सरल कर दिया गया है—लोकतंत्र को “सभी परियों का मिलजुल निर्णय” कहा गया है। शब्दचित्र इतने सशक्त हैं कि चित्रों की आवश्यकता कम पड़ती है। 50-60 पंक्तियों की पुस्तकें एक ही बैठक में पढ़ी जा सकती हैं। यह शैली हिंदी बाल काव्य की उत्कृष्ट परंपरा को मजबूत करती है। व्याकरण शुद्ध तथा उच्चारण सुगम है।  

 शैक्षिक एवं नैतिक मूल्य  
हरियाणा शिक्षा विभाग की अधिकारी के नाते डॉ. प्रियंका ने इन कविताओं में पाठ्यकम से जुड़े मूल्य बुने हैं। पर्यावरण जागरूकता—”प्रकृति मां है, उसे प्यार दो”—लिंग समानता तथा सामाजिक सद्भाव प्रमुख हैं। बच्चे सहभागिता और नेतृत्व सीखते हैं। स्कूलों में नैतिक शिक्षा या बेड टाइम स्टोरी के लिए उपयोगी। ये कविताएं भावनात्मक बुद्धि विकसित करती हैं तथा जिज्ञासा जगाती हैं। राजनीति विज्ञान की उनकी विशेषज्ञता “राजनीति सेवा है, स्वार्थ नहीं” जैसे संदेशों में दिखती है। हरियाणा के सरकारी स्कूल अभियानों के अनुरूप ये पुस्तकें आदर्श हैं। बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक।  

 रोचकता आकर्षण एवं प्रभाव  
रोचकता के मामले में ये कविताएं पूर्णांक प्राप्त करती हैं। बच्चे परियों के जादू में डूब जाते हैं, व्यस्क नैतिक संदेशों से प्रभावित होते हैं। पढ़ने के बाद बच्चे प्रश्न पूछते हैं, संवाद बढ़ता है। डिजिटल युग में किताबों से जोड़ने वाली दुर्लभ रचनाएं। हरियाणवी संदर्भ जैसे “खेतों में उड़ती काइटें” स्थानीयता प्रदान करते हैं। प्रभाव दीर्घकालिक है—बच्चों में कल्पना शक्ति तथा मूल्यबोध जागृत होता है। अभिभावक कक्षा शिक्षक इसे कंफिडेंटली उपयोग कर सकते हैं। एकमात्र कमी—कुछ स्थानों पर भाषा थोड़ी औपचारिक, किंतु बाल साहित्य में स्वाभाविक।  

समग्र मूल्यांकन एवं सिफारिश  
डॉ. प्रियंका सौरभ की ये बाल काव्य पुस्तकें हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। शिक्षा राजनीति विज्ञान तथा साहित्य का अनुपम संगम। 10/10 अंक। हर अभिभावक, शिक्षक तथा पुस्तक प्रेमी इन्हें खरीदें। बच्चों के लिए अनिवार्य पढ़ाई। प्रियंका जी को हार्दिक बधाई—ऐसी रचनाओं से हिंदी बाल काव्य समृद्ध हो रहा है। हरियाणा शिक्षा को गौरवान्वित करतीं है।

— डॉ. सत्यवान सौरभ

*डॉ. सत्यवान सौरभ

✍ सत्यवान सौरभ, जन्म वर्ष- 1989 सम्प्रति: वेटरनरी इंस्पेक्टर, हरियाणा सरकार ईमेल: satywanverma333@gmail.com सम्पर्क: परी वाटिका, कौशल्या भवन , बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045 मोबाइल :9466526148,01255281381 *अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों भाषाओँ में समान्तर लेखन....जन्म वर्ष- 1989 प्रकाशित पुस्तकें: यादें 2005 काव्य संग्रह ( मात्र 16 साल की उम्र में कक्षा 11th में पढ़ते हुए लिखा ), तितली है खामोश दोहा संग्रह प्रकाशनाधीन प्रकाशन- देश-विदेश की एक हज़ार से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशन ! प्रसारण: आकाशवाणी हिसार, रोहतक एवं कुरुक्षेत्र से , दूरदर्शन हिसार, चंडीगढ़ एवं जनता टीवी हरियाणा से समय-समय पर संपादन: प्रयास पाक्षिक सम्मान/ अवार्ड: 1 सर्वश्रेष्ठ निबंध लेखन पुरस्कार हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी 2004 2 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड काव्य प्रतियोगिता प्रोत्साहन पुरस्कार 2005 3 अखिल भारतीय प्रजापति सभा पुरस्कार नागौर राजस्थान 2006 4 प्रेरणा पुरस्कार हिसार हरियाणा 2006 5 साहित्य साधक इलाहाबाद उत्तर प्रदेश 2007 6 राष्ट्र भाषा रत्न कप्तानगंज उत्तरप्रदेश 2008 7 अखिल भारतीय साहित्य परिषद पुरस्कार भिवानी हरियाणा 2015 8 आईपीएस मनुमुक्त मानव पुरस्कार 2019 9 इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ रिसर्च एंड रिव्यु में शोध आलेख प्रकाशित, डॉ कुसुम जैन ने सौरभ के लिखे ग्राम्य संस्कृति के आलेखों को बनाया आधार 2020 10 पिछले 20 सालों से सामाजिक कार्यों और जागरूकता से जुडी कई संस्थाओं और संगठनों में अलग-अलग पदों पर सेवा रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 9466526148 (वार्ता) (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) 333,Pari Vatika, Kaushalya Bhawan, Barwa, Hisar-Bhiwani (Haryana)-127045 Contact- 9466526148, 01255281381 facebook - https://www.facebook.com/saty.verma333 twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh