गणराज्य का स्वधर्म
जन की आवाज़ उठे,
सत्य और न्याय का दीप,
अंधकार मिटे।
कानून का बंधन,
सबके लिए समान राह,
धर्म का संकल्प।
सुरक्षित मन और,
स्वतंत्र सोच का विस्तार,
जीवन का मार्ग।
समान अवसरों,
सपनों को पंख देने,
संविधान बोले।
धैर्य और वीरता,
कदम बढ़ाएं हम सब,
देश हो उज्ज्वल।
नैतिकता संग,
कर्तव्य निभाए हर मन,
गणराज्य मुस्काए।
संगठन में शक्ति,
समान अधिकारों का बल,
समृद्धि का गीत।
आओ साथ चलें,
सच्चाई और प्रेम लिए,
भविष्य सजे।
— डॉ. अशोक
