छत्रपति शिवाजी की तुलना किससे करें ?
“शून्य” से “सृष्टि” का निर्माण करनेवाले इतिहास के अद्वितीय व्यक्तित्व शिवाजी की तुलना संसार के अनेकानेक महापुरुषों से हो सकती है।
√ सैन्य संचालन की दृष्टि से सिकंदर, नेपोलियन एवं हनिबाल से
√ दारुण निराशा की घड़ियों में जनता का मनोबल बनाए रखने की दृष्टि से लिंकन एवं चर्चिल से
√ प्रखर राष्ट्रभाव को जाग्रत एवं संगठित करने में वाशिंग्टन, मेजिनी तथा बिस्मार्क से
√ राष्ट्र निर्माण में आत्म-विसर्जन के लिए लेनिन एवंं कमालपाशा से
√ आसक्ति रहिए शासन करने में मार्क्स, ऑरेलियस तथा चार्ल्स प्रथम से
किंतु सम्पूर्ण समुच्चय दृष्टि से शिवाजी की तुलना किस से करें ?
√ शत्रु के सेनापति कल्याण दुर्ग के सूबेदार की लावण्यमयी पुत्रवधू को मातृवत सम्मानित कर लौटा देनेवाले छत्रपति की तुलना किस सत्ताधीश से करें ?
√ माओ तथा चेग्वेरा से लगभग ३०० वर्ष पूर्व शिवाजी ने “गुरिल्ला युद्धतंत्र” का निर्माण किया।
√ नेपोलियन एवं हिटलर के मास्को अभियानों के अनुभवों से सैकड़ों वर्ष पूर्व युद्ध के दौरान सम्भाव्य आपातकाल में सुरक्षित आश्रयस्थल के नाते सुदूर दक्षिण में उपयुक्त प्रदेश का संधान करने की उन्होंने दूरदर्शिता दिखलाई।
√ शास्त्र के नाते “जियोपोलिटिक्स” का विकास होने के २५० वर्ष पूर्व सुदृढ़ नौसेना का गठन कर सागरीय सत्ता का प्रयासपूर्वक सूत्रपात किया।
√ इतिहास के जिस कालखंड में “सेक्युलर” राज्य की कल्पना पश्चिम में लोकप्रिय नहीं थी, उस समय शिवाजी ने हिंदू परंपरा के अनुकूल सम्प्रदाय निरपेक्ष धर्मराज्य की स्थापना की।
√ अध्यात्म प्रवण मनोवृत्ति के कारण अर्जित राज्य से अनासक्त हो कर संत तुकाराम के समक्ष हरिकीर्तन में शेष जीवन व्यतीत करने की इच्छा प्रकट की। एक अन्य अवसर पर तो अपना सम्पूर्ण राज्य ही समर्थ गुरु रामदास स्वामी के चरणों में समर्पित कर दिया।
ज्येष्ठ शुक्ल १७३१ विक्रम संवत् , तदनुसार ६ जून १६७४ ईस्वी संवत् को संपन्न हुआ “शिवाजी का राज्यारोहण” किसी व्यक्ति विशेष का नहीं माना गया। “हिंदवी स्वराज्य” की यह स्थापना तो घोषणा थी हिंदू राज्य के सफल प्रत्याक्रमण की, हिंदू संस्कृति के पुनर्रुत्थान की तथा विश्व धर्म की पुनः प्रतिष्ठापना की।
सनातन काल से हिंदू राष्ट्र ने जिस आदर्श का संरक्षण किया, वही आदर्श मानव रूप धर कर सिंहासनारूढ़ हो रहा है … यही भावना जनमानस में थी उस समय … स्वयं शिवाजी ने भी समय-समय पर इसी धारणा का उद्घोष किया है … _हिंदवी स्वराज्य स्थापित होना चाहिए, यह भी श्री भगवती की इच्छा है। राज्य धर्म का है शिवबा का नहीं है, अतः यह राज्यारोहण धर्म का ही माना जाएगा।
— दत्तोपंत जी ठेंगड़ी
