गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – होली में

देखो यारो आ धमके हैं साली-साले होली में
बहा रहे हैं मिलकर मस्ती के परनाले होली में

रंग गुलाल के बादल सारे आसमान में छाये हैं
बचा सके तो इनसे देखो कौन बचा ले होली में

रंगों की बरसात ने सबको सराबोर कर डाला है
एक रंग में रँगे हुए हैं गोरे-काले होली में

पकवानों की खुशबू ने मन को पागल कर डाला है
चाट पकोड़ी गुझिया पापड़ मिलकर खा ले होली में

मस्ती का ये चिह्न है यारो छः दिन तक नहीं छूटेगा
चाहे जितना रगड़ रगड़कर रंग छुड़ा ले होली में

मस्ती में “बीजू” ने इक ठौ मस्त ग़ज़ल लिख डाली है
मस्ती में ही झूम-झूमकर तू भी गा ले होली में

— बीजू ब्रजवासी