गीतिका
जीवन में आकर अवरोध
देकर जाते पथ का बोध
तेरा, मेरा सब का शोध
कैसे मिटायें हर गतिरोध
दोहन करते हैं दिन-रात
सहते इसी कारण से क्रोध
संवादों की थाम के डोर
पूर्ण करो मेरा अनुरोध
तुम में, मुझ में क्या कुछ भेद?
फिर क्यों करते तुम प्रतिरोध
— पूनम माटिया
