पिता पुत्र
पिता पुत्र का रिश्ता कैसा होता है,
पिता पुत्र की पहचान होता है,
एक दुसरे का अभिमान होता है,
पिता पुत्र का सखा और मित्र होता है,
मानव के रूप में पिता पुत्र का साक्षात भगवान होता है।
पिता पुत्र के पूरे अरमान करता है,
उसके पालन पोषण में अपना जीवन कुर्बान करता है,
गुरु बनकर पुत्र को सफलता की राह दिखाता है,
जो किताबों में नहीं मिलता,
पिता पुत्र को वो ज्ञान दिलाता है,
दुनिया में जीने का सलीका सिखाता है।
पिता से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं,
ये अनमोल है कोई सस्ता नहीं।
पुत्र को जैसा मिलता है अच्छे संस्कार,
उसके अनुरूप उसे जीवन में मिलता है सफलता और पुरस्कार।
पुत्र कभी न भूलें अपने पिता का योगदान,
हमेशा उनपे करें अभिमान और जीवन भर दे उन्हें आदर और सम्मान।
— मृदुल शरण
