कविता

प्रभु दो हमें ज्ञान

जीवन की पथ पे मैं राही अनजान
जन्म से पाया हूँ अज्ञान
पोर पोर में भर दो प्रभु ज्ञान
मैं भी बन जाऊँ जग में विद्वान

जीवन की पथ पे ना हो अभिमान
ना बनूँ मैं जग में मूरख व  नादान
पोर पोर में भर दो प्रभु ज्ञान
मैं भी बन जाऊँ जग में विद्वान

जीवन की पथ पे ना हो गुमनाम
नभ पे चमक जाऊँ जैसे दिनमान
पोर पोर में भर दो प्रभु ज्ञान
मैं भी बन जाऊँ जग में विद्वान

जीवन की पथ पे ना हो  बेईमान
संस्कार में छिपा है मेरी ईमान
पोर पोर में भर दो प्रभु ज्ञान
मैं भी बन जाऊँ जग में विद्वान

जीवन की पथ पे ना हो गुलाम
रग रग में दौड़ रही मेरी स्वाभिमान
पोर पोर में भर दो प्रभु ज्ञान
मैं भी बन जाऊँ जग में विद्वान

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088