लघुकथा

अधूरी नहीं, अलग कहानी

रीना को लोग अक्सर “गलत फैसले लेने वाली औरत” कहते थे। लेकिन कोई उसकी कहानी पूरी सुनना नहीं चाहता था।

पहली शादी उसने अपने माता-पिता की इच्छा से की थी। वह घर में आई तो बहू कम, जिम्मेदारी ज्यादा बन गई। उसका पति रामलाल कुछ भी कार्य नहीं करता था तथा उसका स्वभाव स्वभाव कठोर था, और रिश्ते में अपनापन कम, अधिकार ज्यादा था। दो बच्चे हुए, पर उनके आने से भी रिश्ते में मिठास नहीं आई।

एक दिन उसने हिम्मत की—और तलाक़ ले लिया। लोगों ने कहा—“औरत होकर घर नहीं बसा पाई।”
रीना ने कुछ नहीं कहा। वह बच्चों को लेकर अलग रहने लगी। कई साल उसने संघर्ष में काटे—नौकरी, बच्चों की पढ़ाई, समाज के ताने… सब एक साथ झेलती रही।

फिर उसकी जिंदगी में विकास आया। अलग जाति का था, लेकिन दिल से सच्चा लगा। रीना ने सोचा—शायद इस बार जिंदगी साथ दे दे। दोनों ने शादी कर ली। कुछ साल ठीक चले। लेकिन धीरे-धीरे यहाँ भी वही कहानी दोहराने लगी—अहंकार, असहमति, और दूरी। रीना इस बार जल्दी समझ गई—“हर रिश्ता निभाना जरूरी नहीं होता, कुछ रिश्ते छोड़ देना ही सही होता है।”

दूसरा तलाक़ भी हो गया। अब उसके बच्चे बड़े हो चुके थे। एक बेटा अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में किसी महिला के साथ रहने लगा। रीना ने उसे समझाया नहीं, सिर्फ इतना कहा— “जो रास्ता चुनो, जिम्मेदारी से निभाना।”
आज रीना अकेली है—लेकिन कमजोर नहीं। वह अब दूसरों के घर नहीं बसाती, बल्कि अपनी पहचान बना रही है। एक छोटे से स्कूल में पढ़ाती है और लड़कियों को एक बात जरूर सिखाती है— “ज़िंदगी में गलत फैसले नहीं होते, बस अलग रास्ते होते हैं।”

रीना की कहानी अधूरी नहीं है, बस समाज के हिसाब से अलग है।

— डॉ. सुरेश जांगडा

डॉ. सुरेश जांगडा

पिता का नाम : श्री औमप्रकाश सम्पर्क : गांव व डाकखाना-चुलियाणा, जिला-रोहतक (हरियाणा) कवि व लेखक ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुडे रहकर बीस साल तक "भारतीय वायुसेना" में राष्ट्रसेवा का कर्त्तव्य निभाते हुए सनातन आर्य भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति-प्रेमी कवि हृदय व्यक्ति हैं। आपने वायुसेना से सेवानिवृति के पश्चात छ: साल तक खाद्य एवं पूर्ति विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर कार्य किया। आपने हिन्दी विषय से स्नातकोत्तर, एम. फिल, पीएच.डी की उपाधियां अर्जित की हैं। इसके साथ आपने हिन्दी विषय में यूजीसी नेट, एचटेट व बीएड की परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की हैं। वर्तमान में आप राजकीय महाविद्यालय सांपला रोहतक में हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त हैं। लेखक के विभिन्न राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय शोध-जर्नलों में अब तक 40 शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। लेखक की अब तक पांच पुस्तकें पुस्तकें प्यार का पथ अटपटो, हिन्दी साहित्य की दशा और दिशा, हिन्दी साहित्य की विकास यात्रा के विविध आयाम, चिन्तन, कोरोना काल अवसर या अभिशाप व भारतीय साहित्य में गीतोपदेश का स्थान प्रकाशित हो चुकी हैं। हिन्दी व हरियाणवीं में कविताएं लिखते हैं।

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