संस्मरण

यादें ,मेरी डायरी का वो अधूरा पन्ना… और तुम

​आज एक लंबे अरसे के बाद मन के द्वार पर फिर उसी सुंदर क्षण ने दस्तक दी है। वह एक पल, वह विशेष तिथि और वह चेहरा—ऐसा आभास होता है जैसे समय की गति ठहर गई हो और वक्त के पहिए थम गए हों। तुम्हारी उस पहली दृष्टि की चमक आज भी मेरी आत्मा की गहराइयों में गूँजती है। उस निगाह में एक अनोखा जादू था, जैसे सदियों का अकेलापन और बिछड़ने का दुख एक सुकून भरे पल में सिमट गया हो। संसार के न जाने कितने रंग बदले, अनगिनत सुबहें आईं और हज़ारों शामें ढल गईं; सूर्य अपनी पूरी तपिश के साथ उदय होता रहा और चाँदनी रात के सन्नाटे में वैसे ही बरसती रही, मगर वह अनमोल पल फिर कभी लौट कर नहीं आया। अफ़सोस, तुम मेरे जीवन की राह में शामिल तो हुए, मगर मेरी नियति का हिस्सा न बन सके।​कभी-कभी मन के किसी कोने में यह विचार सिर उठाता है कि काश! तुम्हें यह ज्ञात होता कि मेरी एकांतता के हर ‘जीवन-पृष्ठ’ पर केवल तुम्हारा ही नाम अंकित है। मेरी चुप्पी में तुम्हारी आवाजों की छाया है और मेरी हर आती-जाती स्वांस में तुम्हारी यादों का बसेरा है। जब जीवन की कड़वाहट और संसार की थकान मन को बोझिल कर देती है, तो मैं अपनी पुरानी डायरी के उन धूल भरे पन्नों को पलट लेता हूँ। वे शब्द, जो हर बार एक नई ताजगी के साथ आत्मा को भिगो देते हैं; वह सुगंध, जो वक्त की धूल के बावजूद कभी फीकी नहीं पड़ी। उन पंक्तियों के हर अक्षर में तुम्हारे स्पर्श की गर्माहट, तुम्हारी मुस्कान की कोमलता और तुम्हारी पहली नज़र की निष्पाप भावना आज भी जीवित है।​मैंने इस प्रार्थना को, इस संदेश को कई बार नए रूप और नए शब्दों में लिखा। भावनाएँ वही रहीं, मगर उनकी तीव्रता और गहराई हर बार बढ़ती गई। हर शब्द में तुम्हारी उस जादुई नज़र का प्रभाव समेटा और हर पंक्ति में तुम्हारी खामोशी की वेदना बसाई। वह दिन जब तुमने अपनी लजीली नज़रों से मुस्कुरा कर देखा था, वह मेरे जीवन के इतिहास का सबसे प्रकाशित अध्याय बन गया। उस छोटी सी मुस्कान ने मेरी आत्मा के उजाड़ आँगन में अमर वसंत भर दिया था। उसके बाद समय अपनी चाल चलता रहा, मौसमों की चादर बदलती रही, लेकिन मेरा प्रेम उसी मोड़ पर स्थिर हो गया जहाँ तुम मुझे अकेला छोड़ गए थे। अब वह स्वप्न जो सत्य की शक्ल न पा सका, वही मेरे जीवन का सबसे पवित्र और सुंदर अनुभव बन चुका है।​हर सुबह की पहली किरण में तुम्हारी याद का प्रकाश झलकता है और हर शाम की ओस में तुम्हारी सुगंध रची-बसी महसूस होती है। जब भी जीवन का संघर्ष और कठिन परिश्रम मन को थका देता है, मैं अपनी इस डायरी से बातें करने लगता हूँ। तुम्हारी वह पहली झलक आज भी मेरे जीवन की सबसे सुंदर अभिलाषा है। मेरे एकांत के हर पन्ने पर तुम्हारा नाम इस तरह दर्ज है जैसे मेरा अस्तित्व और मेरा व्यक्तित्व केवल तुमसे ही जुड़ा हो।

​मैं आज भी प्रतीक्षा में हूँ, बिना किसी शिकायत और बिना किसी शिकवे के। मेरे लिए अब तुम केवल एक बीती हुई याद नहीं, बल्कि मेरी आत्मा की अभिव्यक्ति और मेरी धड़कनों की भाषा हो। आज भी जब उन पुराने पन्नों को उलटता हूँ, तो ऐसा अनुभव होता है जैसे वे आज भी प्रकाश बिखेर रहे हों—वही भाव, वही तीव्रता, वही प्रेम जो कभी कम नहीं हुआ। और मैं हर प्रार्थना में यही कामना करता हूँ कि शायद कभी, किसी मोड़ पर, कहीं… तुम फिर से मिल सको।

​– डॉ. मुश्ताक अहमद शाह

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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