गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो अगर बेवफ़ा नहीं होता।
घाव तब तो नया नहीं होता।।

डाल से तोड़ कर सुनो फेंका।
आज कुचला गया नहीं होता।।

राज अपने हमें बता देना।
जो किसी ने सुना नहीं होता।।

प्यार दिल में रखा छुपा कर ही।
दूँ बता हौसला नहीं होता।।

आग दिल में लगी बुझा देते।
प्यार में तो गिला नहीं होता।।

ज़ख़्म नासूर तो नहीं बनता।
दिल अगर फूल – सा नहीं होता।।

रोज़ तूने छला मुझे भरमा।
आज मायूस – सा नहीं होता।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’

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