मोदीजी
मोदीजी कोई साधारण मनुष्य नहीं है, वे हिमालय पर्वत पर तपस्या करके आए हैं, ब्रह्मांड की समस्त दैवीय शक्तियों का आशीर्वाद है उनपर… मोदीजी एक दैवीय अंश है ।
आपकी उम्र 25, 35, 45, 55, 65, कितनी भी हो, आप आज भी उनके जितना सतत काम नहीं कर पाओगे… जबकि वे पहले से ही 75 वर्ष के हैं !
आप चाहे उन्हें पसंद करो, ना करो, वोट करो, ना करो, गालियां दो, ठिठौली करो उनकी या इग्नोर करो… सच यह है कि वह मानव आप सबसे बहुत काबिल और उच्च स्थान पर है..।
60 के बाद अधिकतर रिटायर्ड पुरूष घर का सोफा और टीवी का रिमोट पकड़ लेते हैं और स्त्रियां मंदिर, गुरुद्वारे की सीढ़ियां..।
40 के होने के पश्चात हमारी ही कुछ सीढ़ियां चढ़ने में सांसे फूलने लगती हैं और 10 घंटे की नौकरी के बाद मनुष्य AC कमरे में फोन लेकर, अपने ही घर में do not disturb का तेवर लेकर और “Me time” का लेबल लेकर बैठ जाता है..।
30 वाले तो अभी से 40 वालों से भी अधिक उम्रदराज़ दिखने लगे हैं..
ऐसा नहीं कि सभी लोग ऐसे हैं, लेकिन 90% से अधिक लोगों की सटीक यही कहानी है..।
75 वर्ष में वह मानव आज प्रातः दिल्ली में है, शाम को बंगाल में, तो कल मलेशिया है, परसों इजरायल, नर्सों उत्तर प्रदेश में और फिर अगले दिल ओमान… करो ट्राई… नहीं कर पाओगे… वह भी सतत 12 वर्षों से..!
आपके पास पैसे और समय होगा, तो भी मौज- शौख-मस्ती खातिर भी आप कांस्टेंट ट्रैवल कभी नहीं कर पाएंगे ! काम के लिए महीने में 4 बार मीटिंग के लिए बाहर भी चले जाना पड़ जाए, तब भी मुंह फूल जाएगा आपका !
देश के लिए कुछ भी करने का कीड़ा चाहिए..! खैर.. समझते सब हैं यहां पर परंतु, बस मानने में इगो हर्ट हो जाता है लोगों का..।
दिन का जितना समय आप उन्हें गालियां देने में, प्रश्न पूछने में, अपमानित करने में, अभद्र टिप्पणियां करने में, नीचा दिखाने में, उनके मीम, कार्टून बनाने में और सोशल मीडिया पर डींगे हांकने में निकाल देते हैं, उतने समय में वे देश के 3 अलग अलग शहरों में प्रवचन दे आते हैं और चार पांच देश के प्रेसीडेंट से फोन पर वार्तालाप करके अपना काम संभाल लेते हैं..।
यही कारण है कि वे राजा हैं और हम प्रजा..।
लीडरशिप सीखना हो, तो उनसे सीखो… अरे मैं तो कहता हूं कम से कम आपकी दृष्टि में जो वे कैमरा में रहने के लिए इतना कुछ करते हैं, तुम भी वही कर लो… ताकत होनी चाहिए !
कुछ नहीं कर सकते हैं तो अपने घर या आसपास में बैठे 75 वर्ष के वरिष्ठजनों को ही देख लो.. बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर आपको घर, पड़ोस में ही मिल जायेंगे..!
आईना देखना बहुत आवश्यक है… मैं तो उनके सामने स्वयं को बहुत छोटा महसूस करता हूं… परंतु उसमें मेरी अंधभक्ति एक कारण हो सकती है ! बाकी अपना-अपना
आप स्वयं विश्लेषण करो …
— संकलित
