अन्तर्राष्ट्रीय चाय दिवस
जब बात चाय की हो
पकौड़े सहज याद आ जाते हैं
दोनों की दोस्ती है बेशुमार
दोनों एक दूजे के मन भाते हैं।
बिना चाय दिन के शुरुआत की
अब कल्पना करना भी मुश्किल है
एक प्याला गर्मा-गर्म चाय का
दूर करता सारी सुस्ती है ।
परिवार संग बैठ चाय पीने का
आनंद ही कुछ खास एवं निराला है
साथ होती कुछ खट्टी -मीठी बातें
जब हाथ गर्म चाय का प्याला है ।
न जाने ऐसी इसमें क्या खूबी है
अन्य सभी पेय पदार्थों पर है भारी
तमाम नुकसानों की दात्री यह चाय
मैं हूं तेरा ह्रदय से आभारी ।
तुझको देखते ही अजब सी रौनक
मेरे चेहरे पर है छा जाती
प्रातः काल तेरी थोड़ी सी भी देरी
मुझको तनिक भी न सुहाती ।
चलिए अब लिखना बंद करते हैं
मेरे चाय पीने का समय हो गया
आप भी चाय की चुस्की का लें मजा
मैं तो इसके स्वाद में खो गया।
— नवल अग्रवाल
