हाय रे जमाना
हाय रे जमाना
क्या है बताना
कैसे कैसे लोग है
समझ ही न पाना
नकली भेष बनाकर
घूम रहे है छलने को
पहचान पाना मुश्किल है
दुनिया के इस भीडो़ में।
इनकी बाते चिकनी चुपड़ी
सामने से इंसान लगे
पीठ पीछे भाला चलाए
तब ना लगे इंसान है।
इनसे ही सब घर है चलता
इनसे ही बाजार चले
इनकी सारी करतूतों से
दुनिया भी हैरान है।
इन्हें न डर है
पाप पुण्य से
ना ही किसी के अपमानो से
नकली भेष बनाकर देखो
घूम रहे है छलने को।
— विजया लक्ष्मी
