राजनीति

कुकुर पानी पिए सुरुक्का, कबहुं ना बिस्वास करो तुरुक्का !

अंजना ओम कश्यप पर बाद में बात होगी । पहले खान सड़वा की बात करेंगे । बड़े बुजुर्गों की बड़ी पुरानी कहावत है…. कुकुर पानी पिए सुरुक्का, कबहुं ना बिस्वास करो तुरुक (तुर्क) का ! अर्थात कुत्ता पानी सुड़क कर पिए इस पर विश्वास कर लेना लेकिन कभी किसी तुर्क या जिहादी पर विश्वास मत करना ।

पानी पीने के दो तरीके हैं इंसान बैल गाय भैंस ये पानी सुड़ुक कर पीते हैं यानी पानी खींचते हैं जबकि कुत्ता और बिल्ली ये पानी को लपक-लपक कर पीते हैं यानी जीभ को चम्मच के आकार से मोड़कर पीछे की तरफ धकेलते हैं । तो कहावत का मतलब है कि यदि कोई कहे कि कुत्ते को इंसान की तरह सुड़क कर पानी पीते देखा तो उसकी बात पर भी एक बार विश्वास कर लेना लेकिन किसी भी जिहादी पर कभी विश्वास नहीं करना यही सीख हमको इतिहास और बुजुर्गों से मिलती है ।

लेकिन आरएसस का उदारवादी दृष्टिकोण वाला तबका और विशाल संख्या में ऐसे राष्ट्रवादी लोग हैं जो खान सड़ और मीडिया के मुस्लिम एंकर और एंकरानियों को भी राष्ट्रभक्त मान लेते हैं । जबकि ऊपर लिखी हुई कहावत को देखेंगे तो समझेंगे कि ये संभव नहीं है ।

खान सड़वा का जन्मदाता यही राष्ट्रवादी समाज है । जब चीन ने डोकलाम पर अटैक किया और फिर गलवान हमला हुआ तब इस खान सड़वा ने एजुकेशन वाली स्क्रीन का इस्तेमाल कर ये बताया था… कि ऊगो चाइना की सेना बैठा है, इगो भारत की सेना बैठा है, फलनवा चिलनवा…

मैं तभी समझ गया था कि ये सबका काट रहा है । तब राष्ट्रवादी समाज को दीवानापन देखकर मैंने काफी बार सावधान भी किया था । ये भी बताया था कि ये हिंदू नहीं जिहादी है । लेकिन अधिकांश राष्ट्रवादियों ने हमारी बात नहीं मानी । ये खान सड़वा का भस्मासुर राष्ट्रवादियों का ही पैदा किया हुआ है ।

बाद में इस सड़वा ने अपना असली रूप दिखाया । सच्चाई ये है कि खान सड़वा के क्लास में पढ़ने वाली अधिकांश लड़कियों का गर्भ भविष्य में सनातनद्रोहियों का उपजाऊ मैदान बनेगा । इनके गर्भ से आगे जाकर सनातनद्रोही बच्चों का जन्म होगा । और इनके बच्चे भी ऐसे ही सनातन द्रोही होंगे । ये विकराल समस्या बनेगी आगे जाकर । और इसकी क्लास में पढ़ने वाले मेल स्टुंडेंट आसानी से अपनी बहन बेटियां शाहजहां शेख जैसों को रात में सौंप कर आएंगे और सुबह खुद आकर ले जाएंगे ।

ये घटिया और सस्ती एजुकेशन और ईगो ऊगो के चक्कर में पूरे देश का बंटाधार करेंगे । एक जिन्ना नहीं सैकड़ों जिन्ना इस देश में एजुकेशन की मास्टर क्लास लगाते घूम रहे हैं और कोई देखने वाला नहीं है । खान सड़वा ब्रेनवॉश जिस तरह करता है उस पर तो अभी बहुत कम लोगों की ही नजर गई है ।

रही बात अंजना ओम कश्यप की तो वो आज तक की मालकिन कलि पुरी की एक नौकर है उससे ज्यादा हैसियत नहीं । मालिक जितना बोलेगा उतना ही करना है । उसको तन्ख्वाह मोदी नहीं अरुण पुरी देता है । बस इतना ही समझिए बाकी सब मोह माया और फालतू की बात है ।

मीडिया एंकर्स को मोदी इस काबिल भी नहीं समझता कि उनसे बात भी करे, प्रेस कॉन्फ्रेंस ना करने की वजह भी यही है । जब मोदी को जरूरत होती है तो वो चुनाव में इंटरव्यू के लिए बुलवा लेता है । ज्यादातर एंकर खुद ही उसकी एक कृपा दृष्टि के भूखे प्यासे हैं और अमित शाह तो इनमें से कुछ एंकर्स को कुत्ते की तरह ही ट्रीट करते हैं इसका लाइव सचित्र वर्णन कर देंगे तो आपकी हंसी रुकेगी नहीं । तो मूल बात वही है जो सबसे पहले लिखी गई बाकी सब मोह माया है !

— दिलीप पाण्डेय