जब कुछ टूट जाता है
जब कुछ टूट जाता है ..
पीछे छूट जाता है
फिर सब पहले जैसा नहीं रहता
एक दरार रह जाती हैं
जो भर भी जाती है
तो रिसना नहीं भूलती ।
एक गांठ रह जाता है
जो खुल जाता है पर
उसकी सिलवटें नहीं मिटती ।
रिश्ते मे गर्माहट नहीं रहती
संकोच रह जाता है
घाव तो फिर भी भर जातें है
भावों में मोच पड़ जाता है।।
— साधना सिंह
