नुकीली कविता
नुकीले कागज पर
कंटीली कविता
सचमुच अच्छी लगती है
बशर्ते कि वे सब उपक्रम
वाहवाही लूटने के लिए
मात्र दिखावटी न हों
इस से भी अच्छे लगते हैं
वे कंटीले पौधे
जो फूलों की रक्षा के लिए
रोपे गए होते हैं
फूल फूल ही होते हैं
वे सब को अच्छे लगते हैं
परन्तु उन की सुंदरता का दायित्व
उन काँटों पर है जो नुकीले हैं
चुभते हैं दर्द करते हैं
सचमुच कांटे फूलों के
रक्षक होते हैं।
सचमुच फूलों की रक्षा के लिए
काँटों की कविता लिखनी पड़ेगी
नुकीले काँटों की कविता
जो चुभे दर्द करे
ऐसे कंटीले शब्द ही
मुझे अच्छे लगते हैं
क्योंकि वे किसी की
रक्षा करते हैं
सही अर्थों में रक्षा करते हैं
चाटुकारिता का मद्धम विष
उन में नहीं होता
उनमें होता है उपचार का रसायन
जीवन रस की पौध कंटीली होती है
विष जैसे कटु और तिक्त लगती है
उस का हर पत्ता नुकीला होता है
वह पैने कागज पर उकेरी जाती है
ऐसी कंटीली कविता
मुझे अच्छी लगती है।
— डॉ. वेद व्यथित
