कविता

नदी की व्यथा

मैं पर्वत की गोदी से निकली,
निर्मल जल की धारा बन निकली।
कल-कल करती गीत सुनाती,
धरती की प्यास सदा बुझाती।

खेतों में हरियाली लाई,
सूखी मिट्टी में जान जगाई।
पशु-पक्षी सब मेरे अपने,
सबके जीवन से जुड़े थे सपने।

कभी मुझे गंगा कहकर पूजा,
कभी माँ कहकर शीश नवाया।
पर धीरे-धीरे बदल गया मन,
स्वार्थ ने छीन लिया अपनापन।

कूड़े-कचरे से भर दी काया,
ज़हर का मुझको घूँट पिलाया।
कारखानों का काला पानी,
बन बैठा मेरी दुखभरी कहानी।

मछलियाँ तड़प-तड़प मरती हैं,
लहरें भी अब आँसू भरती हैं।
किनारे सूने, मौन हवाएँ,
किससे अपनी पीर सुनाएँ?

फिर भी बहना मेरा धर्म है,
जीवन देना ही मेरा कर्म है।
मैं आज भी यही पुकार रही,
मानवता को आवाज़ दे रही।

मुझको फिर से निर्मल कर दो,
मेरे जल को फिर अमृत कर दो।
नदियाँ बचेंगी तो कल बचेगा,
तभी तुम्हारा भविष्य सजेगा।

धरती फिर मुस्कान बिखेरेगी,
हर फसल खुशी से लहरेगी।
जब नदी बहेगी स्वच्छ, निश्छल,
तभी रहेगा जीवन उज्ज्वल।

— डॉ. मुल्ला आदम अली

डॉ. मुल्ला आदम अली

जन्म तिथि : 26 सितंबर तिरुपति, आंध्र प्रदेश शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी., डी.एफ़.ए.च एण्ड टी., एचपीटी., वेबसाइट ; https://www.drmullaadamali.com यूट्यूब चैनल; https://youtube.com/@drmullaadamali प्रकाशित कृतियाँ : "मेरी अपनी कविताएं" "हिंदी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और सांप्रदायिकता" "युग निर्माता प्रेमचंद और उनका साहित्य", "नन्हा सिपाई", 24 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेख प्रकाशित, 30 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया गया है, कई पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां और कविताएं प्रकाशित। पुरस्कार व सम्मान : एंटी करप्शन फाउन्डेशन द्वारा “नेशनल एजुकेशन आइकन अवॉर्ड – 2019” सोसाइटी फॉर यूथ डेवलेपमेंट द्वारा “स्वामी विवेकानंद युवा सम्मान – 2019”, विश्व संवाद परिषद की ओर से हिंदी साहित्य एवं काव्य सभा (प्रकोष्ठ) के लिए अवैतनिक प्रदेश अध्यक्ष (आंध्र प्रदेश) 2021.

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