बाल कविता

बाल गीत- चंदा मामा

चंदा मामा, चंदा मामा, रात के राजा चंदा मामा,
धरती मां के भाई चंदा, इसीलिए हैं हमारे मामा।
रोज रात को आते हैं, शायद सूर्य से डरते होंगे,
या फिर दिन में हमारी तरह ही, खूब शरारत करते होंगे!
अपनी शीतल रोशनी से, सबका मन बहलाते हैं,
बच्चों के प्यारे मामा हैं, हमें लोरी गाकर सुलाते हैं।
चंद्र-खिलौना मांगा कृष्ण ने, पानी-परात में उन्हें दिखाया,
जैसे मम्मी हमें बहलातीं, यशोदा मां ने उन्हें बहलाया।
नेताओं की तरह हैं मामा, मीठी-मीठी करते बातें,
वादा करते पूए लाने का, कभी न लाते सौगातें!
चांदी जैसी चमक चांदनी, मामा को प्यारी लगती है,
लोरी गाकर हमको सुलाती, मामा के संग जगती है।
तारों की बारात सुहानी, चंदा मामा लाते हैं,
शिव भोले को प्यारे लगते, शीश पर उन्हें सजाते हैं।
“सुबह वाली गाड़ी से चले जाएंगे”, चंदा मामा गाते हैं
सपनों के झूलों में झुलाकर, सुबह होते ही जाते हैं।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

Leave a Reply