बढ़ाओ अपने ही देश का मान!
घर-आंगन की शोभा होते,
प्रेम-प्यार और स्नेह अपार,
ऐसे घर-आंगन में खेलें, सुख,
आनंद और खुशियां हजार।
स्नेह-कपाट, सौहार्द झरोखे,
होते घर-आंगन की शान,
छोटों को मिले प्यार का तोहफा,
बड़ों को मिले मान-सम्मान।
जीवन की आपाधापी में,
भूलें न देश के प्यारों को,
पतझड़ का भी स्वागत कर लें,
खुश हों देख बहारों को।
देश के लिए जीना है, मरना है,
अपने ही घर-आंगन को बनाओ,
क्यों सपना देखो विदेश का,
बढ़ाओ अपने ही देश का मान!
— लीला तिवानी
