गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चोटी पगड़ी क्रॉस तिलक या टोपी वाले सब
उस रब की ही संताने हैं गोरे काले सब

सबका रोल अलग है सबके सब आवश्यक हैं
चंद्रप्रभा घनघोर अँधेरे और उजाले सब

शीश झुकाकर रब के ही जैसा पूजो उसको
जिसकी मेहनत से पाते हैं लोग निवाले सब

उसकी कातिल आँखों के आगे सब फीके हैं
तीर खड़ग तलवार कटारी बरछी भाले सब

कष्ट उठाएंगे काहे कुछ काम करेंगे क्यूँ
फ़्री का राशन पाएंगे जब बैठे ठाले सब

सागर की भेजी बूँदे पाते ही उफ़नेंगे
जोहड़ पोखर ताल तलैया नदियाँ नाले सब

जिनको सत्य नही दिखता है उनकी आँखों से
वक्त उतारेगा बंसल जी पर्दे जाले सब

— सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.

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