बाल कविता

बाल कविता – जुगनूं

रात में जुगनूं
मस्ती करते हैं
उड़ते हैं गगन में

कभी इधर, कभी उधर
दूर तक दौड़ लगाते हैं

एक लम्बी उड़ान
जुगनूं जब भरता है

सारे बच्चे देखकर
खिलखिलाते हैं

जब जुगनूं नीचे आता है
सब बच्चे पकड़ने दौड़ते

जुगनूं चकमा देकर
फिर लेता है एक उड़ान

नहीं पाते जुगनूं को बेचारे
सब बच्चे हाथ मलते रह जाते

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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