गीत/नवगीत

सरकारी स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान

सरकारी स्कूल हैं, शिक्षा की पहचान।
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

माटी की खुशबू लिए, खिलते नन्हे फूल।
भारत का भविष्य हैं, ये सरकारी स्कूल॥
संस्कारों की छाँव में, बढ़ता हिंदुस्तान।
शिक्षा के मंदिर यही, भारत की पहचान॥
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

धन से शिक्षा तौलना, कैसा हुआ विचार।
बच्चों को ग्राहक बना, खो गए संस्कार॥
अंग्रेज़ी के मोह में, भूले अपनी शान।
मातृभाषा से ही सजे, संस्कृति का सम्मान॥
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

मत बाँटो शिक्षा कभी, धन-दौलत के हाथ।
सबके सपनों को मिले, लोकतंत्र का साथ॥
किसान, श्रमिक के लाल भी, भरें ऊँची उड़ान।
यही लोकतंत्र का सदा, सबसे सुंदर मान॥
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

शिक्षक, मात-पिता सभी, निभाएँ अपना धर्म।
चरित्रवान पीढ़ी गढ़ें, शिक्षा का हो कर्म॥
जन-जन मिलकर ठान लें, बदलें हिंदुस्तान।
सरकारी विद्यालयों का, ऊँचा हो सम्मान॥
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

निजी भवन ऊँचे सही, ऊँची नहीं उड़ान।
चरित्रों से ऊँची बने, भारत की पहचान॥
शिक्षा, सेवा, सभ्यता, इनसे पाए मान।
सरकारी स्कूल बचें, बने देश महान॥
स्कूल बचेंगे तो बचे, संस्कार और ज्ञान॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh

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