कविता

बारिश और चाय

बारिश, चाय और ढेर सारी वो बेमतलब बातें,
कभी -कभी बहुत याद आती हैं वो मुलाकातें।

तुम अगर कहते तो हम कभी न जाते छोड़ कर,
तुमने लाकर खड़ा कर दिया था हमें ऐसे मोड़ पर।

आज भी बारिश होती है ,बूंदों की खन-खन भी,
चाय भी होती है और बातें भी पर अपनापन नहीं।

कभी सोचती हूँ क्या तुम भी ऐसे ही याद करते हो,
बारिश और चाय सामने हो हमारी बात करते हो।

कुछ रिश्ते भले कुछ पल के लिए होते हैं हमारे लिए,
पर मन के किसी कोने में बस जाते हैं जब तक जीएं।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

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