कविता

तिरंगा

शहीदों की शहादत का,
अमर परिणाम है झंडा,
हमारी आन है झंडा,
हमारी शान है झंडा।
तिरंगे की कसम हमको,
इसे झुकने नहीं देंगे,
सजे तन पर कफन बनकर,
यही अरमान है झंडा।

लिए फिरते हथेली पर,
सदा ही जान वो सैनिक
कहीं भी आपदा आए,
पहुँच जाते वहीं सैनिक।
रक्षक हैं वतन के वो,
तभी लहरा रहा झंडा।
नवाते शीश हम अपनी,
जहाँ भी तुम रहो सैनिक।

जनक को भी नमन करते,
जना जिसने तुझे वीरों,
कलेजा काटकर अपनी
विदा करती तुझे वीरों।
तिरंगे में लिपट जब तू
चला आए जनम-भू पर
नवाती शीश वो झुक कर
लिए नैनन नमी वीरों।

— सविता सिंह मीरा

*सविता सिंह 'मीरा'

जन्म तिथि -23 सितंबर शिक्षा- स्नातकोत्तर साहित्यिक गतिविधियां - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित व्यवसाय - निजी संस्थान में कार्यरत झारखंड जमशेदपुर संपर्क संख्या - 9430776517 ई - मेल - meerajsr2309@gmail.com