हमारे देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना
हमारे देश के राष्ट्रीय पर्व का अलग ही महत्व है,क्योंकि इसमें हमारे देश के जाबांज स्वतंत्रता सेनानियों का तन-मन धन यहाँ तक की उनके खूं का एक-एक कतरा इस देश को आजाद कराने के लिए समर्पित हुआ है।इनके खूं का एक-एक कतरा हमें याद दिलाता है कि इनके जोश,जज्बे,उत्साह और वीरता के कारण आज हम अमन,चैन की सांस ले पाते हैं।
आइए हम उन शहीदों को याद करें जिनके दम पर हमारा भारत देश हिन्दुस्तान आजाद हुआ।जिनके कारण आज हम अपने देश में एक नई लोकतंत्र की स्थापना कर सके।देश से राजशाही परम्परा,सामन्त शाही परम्परा,का खात्मा हुआ,और एक नये संविधान का सूत्रपात हुआ।जिस संविधान के लागू होने से हमे अपना अधिकार और हक मिला,हम अपनी अस्मिता को बचा पाने में सफल हुए।हम उन महान पुरुषों को नमन करें जिन्होंने देश की अस्मिता,यहाँ की बड़ाई,यहाँ के सम्मान,यहाँ की भलाई के लिए अपना अमन चैन और नींद को हराम किया।और हमारे देश को एक शानदार,सरल सहज और पारदर्शी संविधान दिया।हम याद करे बाबा भीम राव अम्बेडकर को,हम याद करे डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जी को जिन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित कर देश के लिए एक संविधान बनाया। जो हमारे देश ही नही पूरे विश्व के लिए एक शानदार संविधान था। और हमारे देश की नई पहचान बनी।जिसको पूरे विश्व से एक अलग दर्जा दिलाती है।
हमारा संविधान धर्म निरपेक्ष है,जो हमे यह सिखाता है कि हम देश के सभी धर्मों का सम्मान करें।इसलिए पर्व,उत्सव और विशेष अवसर पर हमारा मस्तक सम्मान के साथ झुक जाता है। हमारे देश को शायद इसीलिए अनेकता में एकता का सबसे बड़ा देश कहा गया हैं जहाँ पर अनेक धर्म, संस्कृति, सभ्यता, जाति,सम्प्रदाय,रीत-रिवाज,भाषा- भाषी,रहन- सहन,खान-पान,वेश-भूषा में अंतर होते हुए भी पर्व तीज-त्यौहार में समभाव,सर्वधर्म के आदर्श का परिचय देते हुए एक दूसरे के उत्सव में शामिल होते है,और भाई चारा का धर्म निभाते है। यहाँ के धर्म,संस्कृति की अपनी अलग पहचान है,जिसको कह सकते हैं- “अतिथि देवो भवः”
इस सूत्र वाक्य में पुरा धर्म,कर्म आस्था,विश्वास,पूजा पाठ,ज्ञान ज्योतिष,कला समाया हुआ है।और यही भाव हमे पूरा विश्व में ,विश्व गुरु के नाम से जानता है।
— अशोक पटेल ‘आशु’
