बाल कविता

चिट्ठी

खुशियों का संदेशा लाती।
घर में जब भी चिट्ठी आती।
आँगन में सब दौड़े आते।
हाथों-हाथ खबर हैं पाते।।

स्याही से सब मन की बातें।
कागज पर सब पीड़ा गातें।।
दूर बसे प्रियजन की माया।
शब्दों में अपनापन छाया।।

द्वार डाकिया जब भी आता।
कोई हँसता कोई रोता।।
चिट्ठी की अपनी ही वाणी।
समझें सब अपने ही प्राणी।।

मोबाइल का युग अब आया।
चिट्ठी का है मान घटाया।।
हाथ लिखी जो प्रीत पुरानी।
वो डिजिटल से है अनजानी।।

भाव आज चिट्ठी का खोया।
नव पीढ़ी पूछे क्या गोया।।
चिट्ठी की है अजब कहानी।
कहती हमसे दादी नानी।।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921