कविता

नाग पंचमी

विधा- कविता
शीर्षक- नाग पंचमी

नागपंचमी आस्था, परंपरा और प्रकृति का पर्व है,
हमारी भारतीय संस्कृति का अप्रतिम-अनूठा गर्व है।

श्रावण मास शुक्ल पक्ष का पंचम दिवस है नागपंचमी,
नागों को दूध पिलाने का भक्तिभाव-दिवस है नागपंचमी।

आस्तिक “मुनि” ने “दूध पिलाया “नागों” को निर्विकार,
उस दिन से ही मनने लगा नागपंचमी का त्योहार।

जब सारी दुनिया जीव जंतुओं पशु-पक्षियों की भक्षक थी,
भारत वर्ष की ये धरती तब भी हर जीव मात्र की संरक्षक थी।

आज भी हम गाय को माता, श्वान को स्वामिभक्त कहते हैं,
नदियों को जीवनदाता और पेड़ों-पर्वतों को सर्वस्व-दाता कहते हैं।

सर्पों को तो हम एक दिन दूध पिलाते, आगे-पीछे मारते हैं,
सचमुच जो आस्तीन के सांप होते, उन्हें कहाँ पहचानते हैं!
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244