कुछ मुक्तक- 47
कुछ मुक्तक- 47
1.
सद्भावना
सद्भावना से कायम धरती,
यह भेद नहीं कोई करती,
जग-जीवन को सुदृढ़ करती,
हम धरती पर क्यों भार बनें?
लीला तिवानी
2.
समभाव
सद्भावना से भरपूर गगन,
सीमा-रेखा से दूर मगन,
केवल समभाव की इसको लगन,
क्यों शून्य का हम संहार बनें?
लीला तिवानी
3.
बचपन
खो गया है बचपन मेरा, नफरत की दीवारों में,
कहां रहा है इतना ताप अब, जलते हुए अंगारों में!
जब मैं रोऊं झुनझना नहीं, मोबाइल पकड़ा देते हो,
लोरी के बदले पॉप सांग्स से, दिल मेरा बहला लेते हो!
लीला तिवानी
4.
वर्षा और छाता
भीगने का मन तो था, पर छाता तान लिया,
छाता देखकर वर्षा में, एक साथी मिल गया,
कुछ वो भीगा, कुछ मैं भीगी, आधा-आधा ही सही,
साथी के साथ भीगना, मन को बहुत भा गया।
लीला तिवानी
5.
मोहब्बत
लो बरसने लगी मेरी आँखें सावन में,
मोहब्बत जवां हुई दिल हुआ बेकरार सावन में,
तुम आते तो राहत मिलती धड़कते दिल को,
बेकरारी का आलम उधर भी तो होगा सावन में।
लीला तिवानी
6.
रिश्ते
मुसीबत में काम आएं जो, वो रिश्ते सच्चे होते हैं,
जो देखें तोल कर रिश्ते, अक्ल के कच्चे होते हैं,
जो पैसे पास हों अपने, तो रिश्ते खास हो जाएं,
प्रेम की बात मत पूछो, ये धागे कच्चे होते हैं।
लीला तिवानी
7.
आंसू
ख़ुशी के आंसू रुकने न देना,
ग़म के आंसू बहने न देना,
ये ज़िंदगी ना जाने कब रुक जाएगी,
मगर ये प्यारा-सा रिश्ता कभी टूटने न देना।
लीला तिवानी
8.
मुलाकातें
मुलाकातें बहुत जरूरी हैं अगर रिश्ते निभाने हैं,
लगातार भूल जाने से तो पौधे भी सूख जाते हैं.
खूबसूरत-सा एक पल रिश्ता बन जाता है,
जाने कौन कब जिंदगी का हिस्सा बन जाता है।
लीला तिवानी
9.
खूबसूरती
संवेदनशीलता को सजाए रखना हमारी फितरत है,
वरना रिश्तों की खूबसूरती कहाँ बच पाती है,
सच है मुलाकातें बहुत जरूरी हैं रिश्ते निभाने के लिए,
यही मुलाकातें खूबसूरत रिश्तों का बेजोड़ पुल बन जाती हैं।
लीला तिवानी
10.
दीवार
कभी तो मेरा हिस्सा लेकर भी दीवार नहीं बच पाती है,
बड़े अनमोल खून के रिश्तों को बेकार कर जाती है,
कभी तो दूर के सरल-विरल रिश्ते भी अनमोल हो जाते हैं,
उनके बीच की दरकी दीवार भी बेहद मज़बूत हो जाती है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
