भाषा-साहित्यलेख

दुर्जन दर्पण सम

अभिव्यक्तिमनकी

दुर्जन दर्पण सम सदा,करि देखौ हिय गौर।
संमुख की गति और है, विमुख भए पर और॥

दुष्ट व्यक्ति दर्पण के समान होते हैं. दर्पण सामने होने पर चेहरा दिखाता है, हटने पर कुछ नहीं दिखाता। दुष्ट लोग भी सामने मीठी बातें करते हैं और पीठ पीछे छुरा भौंकते हैं। दुष्ट व्यक्तियों की मीठी बातों के झांसे में न आकर उनकी असलियत समझकर उनसे बचना चाहिए।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244