देश है मेरा प्यारा
विधा- कविता
शीर्षक- देश है मेरा प्यारा
गौरवान्वित भारत है मेरा, देश है शान हमारी,
हम से गौरव बढ़ा देश का, जाएं इस पर वारी।
भारत मेरी जन्मभूमि है, भारत ने ही पाला,
गीत इसी के गाऊंगी मैं, देश है मेरा प्यारा।
संत-महंतों ने इस देश को, जगद्गुरु है बनाया,
वीरों की इस धरती ने, वीरोत्सव खूब मनाया।
चरणों में हिंद सागर इसके, शिखर हिमालय जैसा,
ताजमहल-सा ताज यहां पर, कहीं न देखा ऐसा।
तुलसी-मीरा-सूर-कबीरा, गीत सुनाने आए,
प्रेम-प्यार का लिए अबीरा, इसे सजाने आए।
शून्य-दशमलव जैसी निराली, खोज इसी भारत की,
झांसी की रानी-सी नारी, ओज इसी भारत की।
होली-दिवाली-पोंगल-तीज-से, पर्व अनोखे प्यारे,
साथी हाथ बढ़ाना जैसे, गीत अनोखे न्यारे।
अब तो चंद्रमा पर लहराया, अपना तिरंगा झंडा,
इसकी शान हैं कृष्णा-कावेरी, क्षिप्रा-यमुना-गंगा।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
