शीत सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा
काम काज कुछ भी नहीं, खर्च हज़ारों लाख
संसद की महिमा घटी, नेताओं की शाख
नेताओं की शाख, राख कर दिए लुटेरे
संसद में भी छात्र बन गए तेरे मेरे
कह सुरेश कविराय हो गया अरबों खर्चा
पढ़े लिखे जाहिल तुम कहां करोगे चर्चा
— सुरेश मिश्र
