कविता

प्रभु का बारंबार आभार

विधा- कविता
शीर्षक- प्रभु का बारंबार आभार

जिसने जीवन दिया सभी को,
उस प्रभु का बारंबार आभार,
जीवन दिया, संवारा प्रेम से,
जीने का संबल दिया, हार्दिक आभार।

उपकार न उसका भूलेंगे कभी,
जन्म से संभाला, संभाल रहा है अब भी,
सुख दुःख में साथ देता है एक वही,
हमारा आधार पालनहार वही है सभी।

नैन दिए दुनिया देखन को जिसने,
रिश्ते-नाते परिवार-संस्कार भी दिए,
आदि और अंत का मालिक है जो,
सांसों की सौगात, अनेक प्राणाधार दिए।

करता है हर पल उपकार, जताता नहीं,
देता भर झोलिया, जताता नहीं,
बारंबार प्रणाम उसको, हार्दिक आभार,
करता है स्नेह की बौछार, जताता नहीं।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244