त्योहारों की देन है खुशियां
विधा- कविता
शीर्षक- त्योहारों की देन है खुशियां
विभिन्न त्योहारों की देन है खुशियां,
चहकती हैं खुशियों से सारी गलियां,
घर-घर बनते तरह-तरह के पकवान,
सखियां मिलकर मनाती हैं रंगरलियां।
भूले-बिसरों को फिर से याद किया जाता,
नई तरह से जुड़ जाता है फिर रिश्ता-नाता,
उपहारों-मिठाइयों का लेन-देन तो है बस बहाना,
त्योहारों में हर दिल खुशियों के गीत गाता।
होली, दिवाली, ईद पर दूर बसे लोग घर आते,
सब मिलकर खाते-पीते, हाल-चाल बतियाते,
जीवन हो जाता है नया-ताजा, रंग-रंगीला,
त्योहार आस्था, धर्म, भक्ति भाव, सदाचार बढ़ाते।
धन्य है भारत भूमि जहां विविध त्योहार है आते,
राष्ट्रीय, आध्यात्मिक, मौसम के भी त्योहार मनाते,
खुशियाँ केवल सम्मान पाने में नहीं, बाँटने में भी है,
सोंधी-सोंधी मिट्टी की खुशबू से घर-आंगन को महकाते।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
