कविता
हिम्मत करें ईंसान तो क्या हो नहीं सकता,
असंभव को भी संभव है कर सकता।
बस मन में कर ले तू प्रण,
और फौलादी बना ले अपना मन।
मुसीबतें चाहे जितनी भी आए,
दुखों की पहाड़ कितने भी ढाए,
तू टूटना नहीं,झुकना नहीं,
कभी भी मंजिल के पथ से पीछे मुड़ना नहीं।
तेरे हिम्मत और जज्बें को समुद्र की लहरें न रोक पाएगी,
तेरे प्रण के सामने पहाड़ो की ऊंचाईयां बौनी नजर आएगी।
याद कर दशरथ मांझी को,
जिसने सिर्फ छेनी और हथौड़े से,
पहाड़ो को तोड़कर रास्ता बनाया,
जिसे आजतक हमसब नहीं भूलाया।
तू महान है,बलशाली है,
तेरी बुद्धि सबसे निराली है,
चांद पे आशियाना बना सकते हो,
वहां भी जीने का सपना सजा सकते हो,
बस जज्बा हो फौलादी तेरा,
तो आसमान में भी सीढी बना सकते हो।
— मृदुल शरण
