कविता

बंटवारे की त्रासदी!

विधा- कविता
शीर्षक- बंटवारे की त्रासदी!

देश के बंटवारे के दर्द को,
कैसे भुलाया है जा सकता?
लाखों का विस्थापित होना,
कभी भुलाया न जा सकता।

दुर्भावना का जहर समाप्त हो,
सद्भावना का पुनर्भव हो,
अनेकता में एकता भाव का,
पुनः पनपना संभव हो।

बंटवारा झेला नहीं जिन्होंने वे हैं,
बंटवारे की त्रासदी के दर्द से नितांत छूछे,
भुक्तभोगियों का क्या हाल होता है,
बंटवारे की त्रासदी झेलने वालों से ही पूछे!

बंटवारे का दर्द आज भी सताता है,
अपनी जन्मस्थली की याद दिलाता है,
आज भी याद आते हैं जो उस दिन बिछुड़े,
बंटवारा अपने दंश छोड़ ही जाता है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244