बंटवारे की त्रासदी!
विधा- कविता
शीर्षक- बंटवारे की त्रासदी!
देश के बंटवारे के दर्द को,
कैसे भुलाया है जा सकता?
लाखों का विस्थापित होना,
कभी भुलाया न जा सकता।
दुर्भावना का जहर समाप्त हो,
सद्भावना का पुनर्भव हो,
अनेकता में एकता भाव का,
पुनः पनपना संभव हो।
बंटवारा झेला नहीं जिन्होंने वे हैं,
बंटवारे की त्रासदी के दर्द से नितांत छूछे,
भुक्तभोगियों का क्या हाल होता है,
बंटवारे की त्रासदी झेलने वालों से ही पूछे!
बंटवारे का दर्द आज भी सताता है,
अपनी जन्मस्थली की याद दिलाता है,
आज भी याद आते हैं जो उस दिन बिछुड़े,
बंटवारा अपने दंश छोड़ ही जाता है।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
