हास्य-व्यंग्य – पद्म पुरस्कार के लिए प्रतीक्षारत कवि
कवि चुन्नीलाल एक वरिष्ठ कवि हैं। कई साल जिंदगी का साहित्य में गंवा दिये। उम्र का अंतिम पड़ाव है। कब पके आम की तरह जमींदोज हो जाये। कोई नहीं जानता। वे स्वयं तक नहीं जानते।
उनकी कविताओं में संयोग रस से लेकर वियोग की समस्त रूप रंगों की कल्पनाओं में ढालकर कविताओं में उकेर देने की अलग कल्पनाशीलता है। आज तक चुन्नीलाल का मुकाबला कोई नहीं कर सका।
इनकी काव्य की दुनिया में इनकी एक बेहतरीन दुकान है। जब हर तरह की काव्य पंक्तियाँ पिरो-पिरोकर लिखते हैं तो समस्त देवी-देवता तक भी इनकी काव्य रचनाओं के मुरीद हो जाते हैं। साहित्य की इस दुकान में एक से बढ़कर एक काव्य उपलब्ध है।
ऐसे उदार महामना के कवि चुन्नीलाल पद्म पुरस्कार की प्रतीक्षा में है। उनकी आत्मा की आवाज निकल पड़ी है। अब काहे सरकार देर कर रही है। पोथियों का अम्बार लगा दिया हूँ। इतना काव्य लेखन कर दिया पर मेरा दरद न जाणे कोय। मेरी दशा तो मीरा के दरद से भी दर्दीला है।
हर जगह वेटिंग सिस्टम काम कर रहा है। इसका स्वाद बहुत मीठा होता है। कवि महोदय इसी परिपाटी को लेकर चल रहे हैं। परम्परा का निर्वहन करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं। सांस के अंतिम समय तक पद्म पाने की प्रतीक्षा कवि चुन्नीलाल को रहेगी।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
