ग़ज़ल
विधा- ग़ज़ल
वतन हमारा, जाँ वतन की,
रहे आबाद खुशबू चमन की।
खून वीरों ने बहाया अपना,
बनी रहे सदा फ़िज़ा अमन की।
हिंदुस्तान दिल में रहता है हमारे,
कोशिश न करना नादानों दमन की।
संगीनों के साये में सरहद पर सोने वाले,
चाह नहीं रखते किसी के नमन की।
मौत भी हारी है बलिदानियों के आगे,
उसमें कहाँ कुव्वत है वीरों के शमन की।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
