बिस्तर
विधा- कविता
शीर्षक- बिस्तर
जीवन के लिए काम जरूरी है,
काम के बाद थकना जरूरी है,
थकने के बाद नींद जरूरी है,
नींद के लिए बिस्तर जरूरी है।
बिस्तर नहीं महज विलासिता है,
बिस्तर तो जरूरी आवश्यकता है,
कभी जमीन ही बन जाती है बिस्तर,
बिस्तर के बिना जिंदगी निर्वासिता है।
जरूरी नहीं कि बिस्तर आरामदायक हो,
जरूरी नहीं कि बिस्तर फूलों की सेज हो,
अदद एक बिस्तर जरूरी है नींद के लिए,
जरूरी है कि बिस्तर में नींद का तेज हो।
कांटे भी कभी बन जाते हैं बिस्तर,
फूल भी कभी नहीं बन पाते हैं बिस्तर,
जहाँ नींद अच्छी आ जाए, थकान मिटे,
वही सही मायने में होता है बिस्तर।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
