कविता

बिस्तर

विधा- कविता
शीर्षक- बिस्तर

जीवन के लिए काम जरूरी है,
काम के बाद थकना जरूरी है,
थकने के बाद नींद जरूरी है,
नींद के लिए बिस्तर जरूरी है।

बिस्तर नहीं महज विलासिता है,
बिस्तर तो जरूरी आवश्यकता है,
कभी जमीन ही बन जाती है बिस्तर,
बिस्तर के बिना जिंदगी निर्वासिता है।

जरूरी नहीं कि बिस्तर आरामदायक हो,
जरूरी नहीं कि बिस्तर फूलों की सेज हो,
अदद एक बिस्तर जरूरी है नींद के लिए,
जरूरी है कि बिस्तर में नींद का तेज हो।

कांटे भी कभी बन जाते हैं बिस्तर,
फूल भी कभी नहीं बन पाते हैं बिस्तर,
जहाँ नींद अच्छी आ जाए, थकान मिटे,
वही सही मायने में होता है बिस्तर।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244