धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै

अभिव्यक्ति मन की
‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै,कीजै राम-सनेह।
अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥

मनुष्य को सारे छल-कपट छोड़कर सच्चे मन से भगवान राम से प्रेम करना चाहिए। हमारे इस शरीर और मन को भली-भांति देखने-जानने वाले सर्वज्ञ स्वामी से कुछ भी छिपाना व्यर्थ है। भगवान की भक्ति में कोई दिखावा या कपट नहीं, सच्चा और निष्कपट स्नेह होना चाहिए।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244