‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै
अभिव्यक्ति मन की
‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै,कीजै राम-सनेह।
अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥
मनुष्य को सारे छल-कपट छोड़कर सच्चे मन से भगवान राम से प्रेम करना चाहिए। हमारे इस शरीर और मन को भली-भांति देखने-जानने वाले सर्वज्ञ स्वामी से कुछ भी छिपाना व्यर्थ है। भगवान की भक्ति में कोई दिखावा या कपट नहीं, सच्चा और निष्कपट स्नेह होना चाहिए।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया
